Zero Unit for Level 03 Automobile/

Q 1.  Engine क्या है ?

Ans.       Engine को Automobile का दिल (heart) भी कहा जाता है | यह स्थायी  एवं अस्थायी (temporary) पुर्जों का वह ढांचा है, जो रासायनिक उर्जा (chemical energy) को तापीय उर्जा (heat energy) में एंव तापीय उर्जा को यांत्रिक उर्जा में बदलता है|

“Engine is structure of temporary& permanent parts which converts chemical energy into heat energy and heat energy into mechanical energy “.

Q2.  Engine कितने types के होते हैं ?

Ans.      ये  Mainly दो प्रकार के होते हैं  :-  

(i)              Internal Combustion Engine ( इंटरनल कंबशन इंजन )

a.     Spark Ignition ( SI Engine )  स्पार्क इग्निशन इंजन

b.    Compressed Ignition ( CI Engine ) कम्प्रेस्ड इग्निशन इंजन

(ii)            External Combustion Engine ( एक्सटर्नल कंबशन इंजन )

a.     Steam Engine

b.    Turbine

 Internal Combustion Engine ( आंतरिक दहन इंजन ) :-  इस प्रकार के इंजन में इंधन का दहन cylinder के अंदर होता है | जैसे :- पेट्रोल, डीजल इंजन |  

External Combustion Engine :-  इस प्रकार के इंजन में इंधन का दहन इंजन सिलंडर के बाहर होता है, लेकिन पावर इंजन सिलेंडर में पैदा होती है | जैसे – भाप इंजन |

Q 3.   Automobile क्या है ?

Ans .      Automobile एक ऐसा वाहन है जो स्वयं की शक्ति से चलता है | जैसे कार, स्कूटर, बस, ट्रक, आदि |

“ Automobile is a self – propelled vehicle which run by its own power."

Que 4.  Automobile के प्रकार बताएं |

Ans.       

  •   Two Wheeler & Three Wheeler ( टू व्हीलर व थ्री व्हीलर )
  •   Passenger Vehicle & Commercial Vehicle ( यात्री व व्यापारिक वाहन ) 
  •    Agricultural Vehicle ( कृषि वाहन ) जैसे – ट्रेक्टर, कंबाइन आदि
  •   Construction Equipment Vehicle ( निर्माण कार्य वाहन )
  •      Special Vehicle  ( विशेष वाहन ) जैसे – क्रेन, ट्रेन, लिफ्ट |

Q 5. पट्रोल एंव डीजल में अंतर  (difference) बताएं | 

Petrol Engine

Diesel Engine

(i)           इसे स्पार्क इग्निशन इंजन भी कहते हैं |

(ii)          यह इंजन कम आवाज करते हैं |

(iii)         इसमें पट्रोल का इंधन के रूप में प्रयोग करते हैं |

(iv)        इस प्रकार के इंजन में स्पार्क प्लग द्वारा इंधन (fuel ) का दहन होता है |

(v)         इस प्रकार के इंजन की शुरूआती कीमत कम होती है |

(vi)        इस प्रकार क्व इंजन को चलाने की कीमत (running cost ) अधिक होती है |

(vii)       इस प्रकार के इंजनों को कम रख – रखाव की जरुरत होती है | 

(i)              इसे कम्प्रेस्ड इग्निशन ( CI ) इंजन भी कहते हैं |

(ii)             यह इंजन अधिक आवाज करते हैं |

(iii)           इसमें  डीजल का इंधन के रूप में प्रयोग करते है |

(iv)           इस प्रकार के इंजन मै स्पार्क प्लग द्वारा नहीं  बल्कि हाई प्रेशर एंव हाई टेम्प्रेचर से इंधन (fuel) का दहन होता है |

(v)             इस प्रकार के इंजन की शुरूआती कीमत अधिक होती है |

(vi)           इस प्रकार के इंजन को चलाने की कीमत कम होती है |

(vii)          इस प्रकार के इंजन को अधिक रख – रखाव की जरुरत होती है |


Que 6. 
इंजन के मुख्य भागों के नाम  बताएं | ( Tell about  major components of Engine ).



Ans.        (i) Piston 
(पिस्टन)                                

 (ii) Piston rings (पिस्टन रिंग)

   (iii) Connecting rod  (कनेक्टिंग रोड)  

    (iv) Crank Shaft (क्रैंक शाफ्ट)

   (v ) Cylinder Head  ( सिलेंडर हेड )           

  (vi) Cam Shaft (कैम शाफ्ट)

 (vii )  Cylinder Block   (सिलेंडर ब्लॉक)

 (viii) Spark Plug (स्पार्क प्लग)

  (ix ) Flywheel (फ्लाइ व्हील )               

   (x)  Cam Gear (कैम गियर)

  (xi ) Crank Gear   (क्रैंक गियर)            

 (xii) Timing belt (टायमिंग बेल्ट) 

(xiii ) Piston Pin (पिस्टन पिन)            

(xiv) Drain Plug (ड्रेन प्लग)

(xv ) Oil Sump / Oil pan  (ऑयल सम्प)

( xvi ) Piston Pin / Gudgeon pin / Wrist Pin ( पिस्टन पिन / गजन पिन / रिस्ट पिन ) |

Que 7.  इंजन की महत्त्वपूर्ण (important) तकनीकी टर्म (technical term) के बारे बताओ |  

Ans.       TDC ( Top Dead Centre ) :-  यह पिस्टन की वह उपरी से उपरी Position (पोजीशन) है जिससे पिस्टन और अधिक उपर न जा सके |

BDC ( Bottom Dead Centre ) :- यह पिस्टन की वह निचली से निचली अवस्था है जिससे और अधिक नीचे पिस्टन न जा सके |

  Stroke :-    पिस्टन द्वारा TDC से BDC तक या BDC से TDC तक एक चक्कर में तय की गयी दूरी को stroke कहते हैं |  



  Clearance Volume :-  जब पिस्टन TDC पर हो तो तब उसके उपर खाली आयतन (Volume) को क्लीयरेंस वाल्यूम कहते हैं|  

   Swept Volume  :- पिस्टन दवारा TDC से BDC तक ( या BDC से TDC तक ) एक चक्कर में तय किए गए आयतन को swept volume कहते हैं|

 इसे डिसप्लेसमेंट वॉल्यूम ( Displacement  Volume ) भी कहते हैं  |




  Compression ratio ( कम्प्रेशन रेशो ) :- जब पिस्टन BDC पर हो एवं जब पिस्टन TDC पर हो तो उसके उपर के आयतन के अनुपात को कम्प्रेशन रेशो कहते हैं|

       CR =        पैट्रोल  का :-  06 से 14,          डीजल का :-  15 से 22

 Engine Capacity :-  यह इंजन में कुल सभी सिलेंडरो की (cc) डिस्प्लेसमेंट वाल्यूम ( displacement volume ) है |                           n. Vs

BHP Brake Horse Power :- यह क्रैंक शाफ्ट पर deliver हुई कुल पावर है जो कि  इंडीकेटिड  हॉर्स पावर में से सभी पावर नुकसान को निकालकर प्राप्त की जाती है|   

IHP – Indicated Horse Power :- Engine Cylinder में पैदा हुई कुल पावर को इंडीकेटिड  हॉर्स पावर कहते हैं|

FHP ( Frictional Horse Power ) :- इंजन सिलेंडर में पैदा हुई पावर का फ्रिक्शन  (friction) के कारण जो नुकसान होता है, उसे Frictional Horse Power कहते हैं|  

FHP = IHP – BHP 

Q. 8   वाहन के मुख्य सिस्टमों के बारे में बताएं |(Tell about main systems of Vehicle.)

Ans.        (i)    Lubrication System  (लुब्रिकेशन सिस्टम)

    (ii)  Cooling System (कूलिंग सिस्टम)

    (iii)          Transmission System (ट्रांसमिशन सिस्टम)

    (iv)          Fuel Supply System (फ्यूल सप्लाई सिस्टम)

    (v)  Suspension System (सस्पेंशन सिस्टम)

    (vi)          Wheel and Tyre   (व्हील एंव टायर)

    (vii)         Braking System (ब्रे़किंग सिस्टम)

    (viii)       Air Conditioning System (एयरकंडीशनिंग सिस्टम)

    (ix)Steering System ( स्टीयरिंग सिस्टम)

    (x)  Electrical & Electronic System ( इलेक्ट्रिकल एंव इलेक्ट्रोनिक सिस्टम) 

Lubrication System ( लुब्रीकेशन सिस्टम ) :- Moving parts को घिसावट से बचाने

 के लिए उन्हें चिकनाई प्रदान करने को लुब्रीकेशन सिस्टम का प्रयोग करते हैं| 

नोट – इंजन का अपना लुब्रीकेशन सिस्टम होता है, वाहन के अन्य भागों को अलग – 

अलग तरीकों से लुब्रीकेशन प्रदान की जाती है |

 

Cooling System ( कूलिंग सिस्टम ) :- इंजन की गर्मी को नियंत्रित करने के लिए उसे ठंडा करने की process को cooling system कहते हैं |

a.              एयर कूलिंग :- इसमें हवा द्वारा इंजन को ठंडा किया जाता है |

b.               वाटर कूलिंग :- इसमें पानी के प्रयोग द्वारा इंजन को ठंडा किया जाता है |

इसके आलावा Liquid Cooling को भी अपनाया जाता है | - आवश्यकतानुसार |

 

Fuel Supply System :- जिस सिस्टम द्वारा fuel (इंधन) को fuel tank से इंजन सिलेंडर तक पहुँचाया जाता है, उसे fuel supply system कहते हैं |

a.              ग्रेविटी  सिस्टम (Gravity System)

b.              फोर्स फीड सिस्टम (Force feed System )

ग्रेविटी सिस्टम में गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा फ्यूल, सिलेंडर में आता है, इसमें फ्यूल टैंक व्हीकल के ऊपर स्थित होता है जबकि फोर्स फीड में किसी force के माध्यम द्वारा यह कार्य होता है |

Transmission System  ( ट्रांसमिशन सिस्टम ) :- इस सिस्टम का कार्य इंजन की power को wheels तक transmit करना है, इसके मुख्य तीन components होते हैं |

(i)              Clutch Assembly :- इसका function इंजन की पावर को gearbox से engage और disengage करना है

(ii)            Propeller Shaft Assembly :-इसका मुख्य कार्य  rear wheel drive में गियर बाक्स की पावर को differential (डिफरेंशिअल) तक पहुँचाना है |

(iii)          इसका मुख्य कार्य road की जरूरतों के अनुसार गियर को बदलकर speed और torque उपलब्ध करवाना है, और वाहन को आवश्यकता अनुसार reverse करना है |

Suspension System  (सस्पेंशन सिस्टम ) :- इस सिस्टम का मुख्य कार्य वाहन को पहियों से जोड़ना हैं | इसमें shock absorber strut, spring, ball joint, knuckle  joint आदि आते हैं |

Wheel & Tyre  (व्हील एंव टायर ):- Wheel वाहन का वह भाग है जिसकी सहायता से vehicle सड़क पर roll करता है |

(i)              Tyre को rim पर fit करते हैं , यह three type के होते हैं | Tube Tyre, Tubeless Tyre , Solid Tyre (छोटे बच्चे की bicycle में प्रयोग होते हैं|)

Braking System  ( ब्रेकिंग सिस्टम ) :- इस system का function वाहन की speed को कम करना या रोकना है, मुख्य रूप से प्रयोग होने वाले braking system हैं-

(i)              Mechanical (मैकेनिकल)

(ii)            Disc brakes

(iii)          Hydraulic (हाईड्रोलिक)  

(iv)          Vaccum Servo

(v)            Air Braking

Air Conditioning System  (एयरकंडीशनिंग सिस्टम ) :- इस प्रकार के सिस्टम का प्रयोग वातावरण के अनुसार वाहन को inside temperature को control करना है|

इसके मुख्य भाग है :-  

(i)              Compressor Condensor Unit(कम्प्रेसर कंडेंसर यूनिट)

(ii)            Magnetic Clutch Unit(मेग्नेटिक क्लच यूनिट)

(iii)          Condensor

(iv)          Evaporator

(v)            Receiver Drier Unit(रीसीवर ड्रायर यूनिट)

(vi)          Expansion Valve etc.(एक्सपेंशन वाल्व)


Steering  System  (स्टीयरिंग सिस्टम ) :- इस सिस्टम का कार्य vehicle के अगले पहियों को मोड़ना है | सबसे साधारण और अधिक प्रयोग होने वाला steering हैं :- Rack & Pinion Type (रैक एंड पिनियन टाइप) स्टीयरिंग  सिस्टम | 

Electrical & Electronic System  ( इलेक्ट्रोनिक सिस्टम ) :- इसमें निम्नलिखित रूप से सिस्टम हैं :-

(i)              Starting System (स्टार्टिंग सिस्टम) :- इस सिस्टम का मुख्य कार्य इंजन को स्टार्ट करना है, इसमें मुख्य रूप से starting motor,  battery, motor control switch आते हैं|

(ii)            Generating or Charging System ( जेनेरेटिंग एंव चार्जिंग सिस्टम ) :- इस प्रकार के सिस्टम का प्रयोग electricity को पैदा करने एंव बैटरी चार्जिंग (battery charging ) के लिए करते हैं| चलते वाहन में electrical load यही सिस्टम सहन करता है|

(iii)          Ignition System (इग्निशन सिस्टम ) :- इस प्रकार के सिस्टम का प्रयोग सिलेंडर में इंधन (fuel) को जलाने के लिए करते हैं| इसमें मुख्य रूप से distributor ( डिस्ट्रीब्यूटर) , इग्निशन क्वायल (ignition coil), स्पार्क प्लग (spark plug) आदि आते हैं |

Lighting System  (लाईटिंग सिस्टम ) :- इस तरह के सिस्टम में विभिन्न प्रकार की lights आती है| जैसे कि हेड लाईट ( Head Light ), टेल लाइट(tail light), फोग लाइट (Fog Light), ब्रेक लाइट (brake light) आदि आते हैं|

Q. 9   Four stroke पट्रोल इंजन की कार्यविधि (working) समझाएं |

 Ans.        (i) Suction (सक्शन) :- इस प्रकार के stroke में पिस्टन TDC से BDC की तरफ चलना शुरू कर  देता है और inlet value open हो जाता है और हवा–पैट्रोल का मिश्रण इंजन सिलेंडर में प्रवेश करता है|

(ii)            Compression ( कम्प्रेशन) :- इस  stroke में दोनों वाल्व बंद रहते हैं और पिस्टन BDC से TDC की तरफ चलता है | इसमें सिलेंडर में आया चार्ज compress हो जाता है |

(iii)          Power (पावर ) :- इस स्ट्रोक में स्पार्क प्लग द्वारा स्पार्क दी जाती है और दोनों वाल्व बंद रहते हैं और इंधन के जलने से गैसों के दबाव से पिस्टन TDC से BDC की ओर  जाने लगता है |  

(iv)          Exhaust (एग्जास्ट) :- इस स्ट्रोक में एग्जास्ट वाल्व खुलता है इसमें piston TDC की तरफ गति करता है और जली हुई गैसें इंजन सिलेंडर से बाहर निकल दी जाती हैं |

यदि एक से अधिक इंजन सिलेंडर हो तो इनलेट हा चार्ज एक ही रस्ते से सभी सिलेंडर को जाने के लिए इनलेट मैनिफोल्ड और जाली हुई गैसें एक रास्ते से बहार निकलने के लिए इग्ज़ॉस्ट मैनिफोल्ड करते हैं |  

Q. 10  Four stroke डीजल इंजन की कार्यविधि समझाएं |

Ans.   (i) Suction (सक्शन ) :- इस स्ट्रोक में पिस्टन TDC से BDC की ओर गति करता है और इनलेट वाल्व खुल जाता है और केवल हवा ( याद रखें केवल हवा इंधन नही) इंजन सिलेंडर में प्रवेश करती है |  

(ii) Compression (कम्प्रेशन) :- इस स्ट्रोक में पिस्टन BDC से TDC की तरफ गति करता है और दोनों वाल्व इस समय बंद रहते हैं | हवा को इस तरह के इंजनों में उच्च प्रेशर  (high pressure) compress किया जाता है |

(iii ) Power (पावर) :- इस स्ट्रोक में फ्यूल इंजेक्टर नोजल द्वारा धुंध के स्प्रे के रूप में (automized form) डीजल को स्प्रे किया जाता है, जैसे ही यह उच्च दाब वाली गर्म हवा में प्रवेश करता है, यह जल उठता है, गैसों के दबाव से पिस्टन BDC की और जाता है |

(iv ) Exhaust (एग्जास्ट) :- इस स्ट्रोक में exhaust (एग्जास्ट) वाल्व खुल जाता है और पिस्टन TDC से BDC की ओर जाता है जिससे जली हुई गैसें इंजन सिलेंडर से बाहर चली जाती हैं |  


इसे अच्छे से समझने के लिए आप नीचे दी गई वीडियो अवश्य देखें |


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